अर्जुन देवालाकेरे, सकलेशपुर के मूल निवासी, एक लोकप्रिय कन्नड़ लेखक, उपन्यासकार और स्तंभकार हैं। वह मुख्य रूप से 'अतीत', 'अभीर' और 'अवलु-बाडुका कलिसिदावलु' जैसी कृतियों के लिए जाने जाते हैं, जिनमें मलनाड के जीवन, प्रेम कहानियों और गहन विचारों को दर्शाया गया है। युवाओं में अत्यधिक लोकप्रिय, वे 'देवालाकेरे प्रकाशन' के माध्यम से किताबें प्रकाशित करते हैं।