{"product_id":"sugarless","title":"शुगरलेस | Sugarless","description":"\u003cp\u003eपारेलाल को काशी के ऊपर बहुत गर्व था। काशी भी लालजी का बहुत सम्मान करता था। जब उन्होंने चाय की दुकान शुरू की थी, यानी लगभग सात-आठ साल पहले, तब लाला खुद ही दुकान का कारोबार देखते थे। सुबह लगभग नौ बजे आते थे और अपने हैंडबैग से चाबियों का गुच्छा निकालकर एक-एक करके ताले खोलते थे। इतनी अनुशासन से कि काशी को भी उसका क्रम पता चल गया था। पिछले एक साल से बच्चों को दुकान सौंपने के बाद, उन्हें देर से आने की आदत हो गई है। बच्चे अपने पिता जैसे नहीं हैं। ताले खोलने के लिए नौकर-चाकर हैं! इन दिनों पारेलाल दुकान पर ग्यारह बजे आते हैं, आते ही नौकरों से \"काशी टी\" मँगवाकर पीते हैं, बच्चों को कुछ कहते हैं, फिर आज का हिंदी अखबार पलटकर देखने के बाद खाली गिलास लेकर सीधे काशी के पास आते हैं, आते ही \"कितना हुआ काशी?\" पूछते हैं, काशी \"पाँच रुपया शेष\" कहते ही चिल्लर देकर काशी के कारोबार के बारे में पूछकर घर की ओर निकलना उनकी आदत है।\"\u003c\/p\u003e","brand":"BEETLE BOOK SHOP","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":50500616782107,"sku":null,"price":117.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0686\/2150\/0699\/files\/sugarless-8903586.jpg?v=1767528545","url":"https:\/\/beetlebookshop.com\/hi\/products\/sugarless","provider":"Beetle Book Shop","version":"1.0","type":"link"}