{"product_id":"rss-olagu-horagu","title":"आरएसएस ओलागु होरागु | RSS Olagu Horagu","description":"\u003cdiv class=\"col-lg-12\"\u003e\n\u003cp align=\"left\"\u003eराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कई वर्षों से तथाकथित भारतीय संस्कृति के प्रचार में लगा हुआ है, यह स्वघोषणा करते हुए कि वे देशभक्ति के उत्तराधिकारी हैं। आरएसएस के लिए यह सिद्धांत मान्य नहीं है कि संस्कृति का अर्थ किसी से घृणा करना नहीं है। इतिहास की गति में समय-समय पर बहुत से परिवर्तन होते रहते हैं। उनमें से अनुपयुक्त को त्याग कर परंपरा में स्वीकृत शुभ मूल्यों को पोषित करना स्वाभाविक क्रिया है। एक समय में आरएसएस संस्था ने हमारे देश के संविधान को भी उपेक्षा का पात्र बनाया था और डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर की अध्यक्षता में बने संविधान को तिरस्कार की भावना से देखा था और सामाजिक तथा सांस्कृतिक रूप से त्याज्य माने जाने वाले कई प्रक्रियाओं को मौलिक कहकर महिमामंडित किया था। विवेकानंद जैसे संत, युवा पीढ़ी के मार्गदर्शक के वचनों पर अपनी विकृत भाष्य प्रचारित कर विषवृक्ष उगाने के निंदनीय कार्य में भी आरएसएस शामिल रहा है। वास्तव में हमारे देश की सांस्कृतिक परंपरा के मूल्यवान तत्वों को जानकर, उसकी प्रेरणा से हमारे देश को सद्कर्म के मार्ग पर आगे बढ़ना है। दत्तप्रसाद दाभोलकर, विवेकानंद जैसे द्रष्टाओं की मंशा को हृदयस्पर्शी रूप से परिचित कराते हुए, एक वस्तुनिष्ठ कृति प्रस्तुत की है। पाठकों और युवाओं को सांस्कृतिक ऋजुमार्ग को जानने और उसका पालन करने के लिए वर्तमान ग्रंथ बहुत उपयोगी स्रोत ग्रंथ है। हमारे देश की महिमा को हृदयस्पर्शी रूप से चित्रित करने वाले इस ग्रंथ का कन्नड़ भाषी पाठक हार्दिक स्वागत करेंगे, ऐसी आशा है। – जी. रामकृष्ण\u003c\/p\u003e\n\u003c\/div\u003e","brand":"BEETLE BOOK SHOP","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":52213626143003,"sku":null,"price":175.0,"currency_code":"INR","in_stock":false}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0686\/2150\/0699\/files\/shs.jpg?v=1778835462","url":"https:\/\/beetlebookshop.com\/hi\/products\/rss-olagu-horagu","provider":"Beetle Book Shop","version":"1.0","type":"link"}