{"product_id":"puepa-collection-of-kannada-poems-by-shashi-tarikere","title":"प्यूपा | प्यूपा (शशि तरीकेरे कविताएं)","description":"\u003cp\u003eएक व्यक्ति कभी अपना असली चेहरा नहीं देख पाता। सवाल उठता है कि हम जो बाहरी दुनिया देखते हैं या देखने का भ्रम पालते हैं, वह कितनी सच है। सीधे देखने पर हमें सब कुछ सपाट लगता है। तीसरी विमा को देखने के लिए कोण से देखना आवश्यक है। यह कवि ऐसा करते हैं। तब सीधापन तोड़ना पड़ता है। यहाँ एक प्रक्षेपण है; प्रक्षेपण का अर्थ है कहानी में मनगढ़ंत कहानी जोड़ना, अंतर्वेशन। जब कहानी ही मनगढ़ंत होती है और उसमें जोड़ा जाता है उसे ही मनगढ़ंत कहते हैं, तब कहानी प्रामाणिक लगती है और मनगढ़ंत कल्पना का भ्रम पैदा होता है। यह चेहरे को दर्पण के अंदर से देखने जैसा है! या ऐसा सोचना, कल्पना करना। यह कवि अपनी कविताओं में ऐसा करते हैं। वे 'मनगढ़ंत कहानियों' के पुल की तरह हैं। हमें एक से दूसरे पर कूदना होगा। कहीं नहीं जाते, कहीं विश्राम नहीं करते। आधे रुके हुए पुल की तरह। 'सेळवु नोडुवद्क्के माडिडु, अथ्वा नेरेयल्ली सेळेसकोंडू होद्दू ई निरुपाय' यह शब्द मैंने शशि जी की ही एक कविता से लिया है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eके. वी. तिरुमलेश\u003c\/p\u003e\n\u003c!----\u003e","brand":"BEETLE BOOK SHOP","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48707490578715,"sku":"","price":135.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0686\/2150\/0699\/files\/puepa-collection-of-kannada-poems-by-shashi-tarikere-9047467.jpg?v=1767533345","url":"https:\/\/beetlebookshop.com\/hi\/products\/puepa-collection-of-kannada-poems-by-shashi-tarikere","provider":"Beetle Book Shop","version":"1.0","type":"link"}