{"product_id":"nuditeraneledavaru-banuli-kaligalu","title":"ನುಡಿತೇರನೆಳೆದವರು: ಬಾನುಲಿ ಕಲಿಗಳು | Nuditeraneledavaru","description":"\u003cdiv class=\"col-lg-12\" style=\"box-sizing: border-box; margin: 0px; padding: 0px 15px; position: relative; width: 786.5px; flex: 0 0 100%; max-width: 100%; color: rgb(33, 37, 41); font-family: 'Open Sans', sans-serif; font-size: 16px; font-style: normal; font-variant-ligatures: normal; font-variant-caps: normal; font-weight: 400; letter-spacing: normal; orphans: 2; text-align: center; text-indent: 0px; text-transform: none; widows: 2; word-spacing: 0px; -webkit-text-stroke-width: 0px; white-space: normal; background-color: rgb(251, 251, 251); text-decoration-thickness: initial; text-decoration-style: initial; text-decoration-color: initial; height: 110px; overflow: auto;\"\u003e\n\u003cp align=\"left\" style=\"box-sizing: border-box; margin: 0px 0px 1rem; padding: 0px; font-family: 'Open Sans', sans-serif; color: rgb(119, 119, 119); font-size: 14px; font-weight: 400;\"\u003e1) क्या आप जानते हैं कि कर्नाटक में आकाशवाणी केंद्र कब शुरू हुए थे? 2) क्या आप हमारे मैसूर के देश के पहले निजी चैनल की कहानी जानते हैं? 3) क्या आप जानते हैं कि मैसूर बंगलुरु बन गया, 19 साल के लिए बंद हो गया और फिर से शुरू हुआ? 4) क्या आप जानते हैं कि दोरेस्वामी अय्यंगार, आर.के. श्रीकंथन, मैसूर वासुदेवाचार्य के पोते एस. कृष्णमूर्ति, एच.के. नारायण, पद्मचरण जैसे संगीत के जादूगरों ने 30 से अधिक वर्षों तक आकाशवाणी में कलाकार के रूप में सेवा की है? 5) क्या आपको आश्चर्य होगा अगर मैं कहूं कि आकाशवाणी ने 1954 में ही आमंत्रित श्रोताओं की उपस्थिति में संगीत कार्यक्रम आयोजित किए थे? 6) क्या आप जानते हैं कि वॉयस टेस्ट कैसे आयोजित किए जाते थे, और इसके लिए नियम कैसे तैयार किए गए थे? 7) क्या आपने आकाशवाणी रूपक, आकाशवाणी नाटक की दुनिया का भ्रमण किया है? 8) बेंगलुरु आकाशवाणी के प्रयोग, जिन्होंने विज्ञान श्रृंखला को सरल बनाकर देश में ख्याति प्राप्त की... कमाल! 9) कृषि पाठशाला में गायों, बछड़ों, बैलों, भैंसों, मुर्गियों को पुरस्कार दिए गए। किसानों के लिए बोरवेल खोदे गए। क्या आपने सुना है? 10) उद्घोषक आकाशवाणी चित्रगीत आधारित कार्यक्रमों को पालियों में प्रस्तुत करते हैं। क्या आपने उनकी राय और उनके दिल की बात सुनी है.... ............ \"नुडितेरनेलदावरु, बानुली कलिगलु\" पुस्तक ऐसे दस और कई विचारों को सामने ला रही है। \"नुडितेरनेलदावरु\" पुस्तक 1940 से 1990 की अवधि में आकाशवाणी में सेवा करने वाले महान प्रसारकों के व्यक्तिगत चित्रों का परिचय देती है। कर्नाटक के आकाशवाणी केंद्रों में किए गए कार्यों का स्थूल दस्तावेजीकरण! करुनाड कोरल की कहानियां!! प्रयोग, अवधारणाएं!! कई विशेषज्ञों ने इस तरह के प्रयास को देश में पहला बताया है। आइए, उन महान लोगों को सलाम करें जिन्होंने नुडितेर को खींचा है। आइए हम कन्नड़ भाषा, संगीत और सांस्कृतिक दुनिया में आकाशवाणी के योगदान को याद करें\u003c\/p\u003e\n\u003c\/div\u003e","brand":"BEETLE BOOK SHOP","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49964633194779,"sku":"","price":351.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0686\/2150\/0699\/files\/nuditeraneledavaru-banuli-kaligalu-8931598.jpg?v=1767531067","url":"https:\/\/beetlebookshop.com\/hi\/products\/nuditeraneledavaru-banuli-kaligalu","provider":"Beetle Book Shop","version":"1.0","type":"link"}