{"product_id":"mahatme-stories","title":"महात्मे - कहानियाँ | चीमनहल्ली रमेशबाबू","description":"\u003cp\u003eगंगिरेड्डी अपने बड़े भाई का चेहरा नहीं देखना चाहता था। वह काफी देर तक बिना कुछ बोले बैठा रहा, उसकी आँखें नम होने लगीं। उसे सिसकियाँ लेकर रोने का मन हुआ। उसने एक बार सिर उठाकर देखा। वहाँ मौजूद लोग उसकी सहमति के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। गंगिरेड्डी को किसी की परवाह नहीं थी, वह उठा और बाहर चलने लगा। देवरेड्डी की आवाज भी उसे सुनाई नहीं दी, वह तेजी से बाहर निकला और शहर के दिल में घुस गया। उस दिन रविवार था, इसलिए भीड़ बहुत थी। बाजार के कारण शहर की सड़कें भरी हुई थीं। गंगिरेड्डी शहर के मुख्य चौराहे के बीच में आकर खड़ा हो गया और आकाश देखने लगा।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003eचारों दिशाओं से वाहनों की आवाजें आसमान छूने लगीं। वह बिना हिले-डुले खड़ा रहा। वाहनों की आवाजें और तेज हो गईं। ट्रैफिक सिग्नल की बत्तियाँ अपने आप रंग बदल रही थीं। गंगिरेड्डी ने अपना सिर और ऊपर उठाया और जोर से गाना गाने लगा, 'शनि राजा उज्जैन नगरी में आ रहे हैं... कलिराजा एक भव्य अश्व ला रहे हैं... सभी व्यापारी लोग इकट्ठे हों... विक्रमराजा भी...'। वाहनों की भीड़भाड़ में उसका गाना ऊर्ध्वाधर रेखा में ऊपर उठा और आकाश के नीले रंग में नीले रंग की तरह फैलने लगा।\u003c\/p\u003e","brand":"BEETLE BOOK SHOP","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":51587447849243,"sku":null,"price":135.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0686\/2150\/0699\/files\/mahatme-stories-cheemanahalli-rameshababubeetle-book-shop-2334055.jpg?v=1767745027","url":"https:\/\/beetlebookshop.com\/hi\/products\/mahatme-stories","provider":"Beetle Book Shop","version":"1.0","type":"link"}