{"product_id":"katari-anchina-nadige-contemporary-parodies","title":"कटारी आंचिना नडिगे (समकालीन पैरोडी)","description":"\u003cp\u003eचंद्रप्रभा कटारिया की वर्तमान पुस्तक 'कटारी अंचिना नडिगे', उनके द्वारा समय-समय पर लिखे गए 34 स्तंभ लेखों का संग्रह है। सीधे और स्पष्ट बोलने के लिए जाने जाने वाले उन्होंने इस पुस्तक में पाठकों को समझाया है कि व्यंग्य और विडंबना भी कितनी प्रभावी हो सकती है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eइस तरह लिखने का साहस उनमें होना वाकई खास बात है। कटारिया ने यहां बिना किसी झिझक के उन विषयों पर लिखा है जिनके बारे में कई लोग फुसफुसाने से भी डरते हैं।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eकटारिया के तीखे व्यंग्य-विडंबनाएं वर्तमान की कई घटनाओं के इर्द-गिर्द विकसित हुई हैं। सांप्रदायिकता, नफरत भरे भाषण, धार्मिक गड़बड़ियां, केवल गरीबों के घरों पर चलने वाले बुलडोजर, भ्रष्टाचार में वृद्धि, पाठ्यपुस्तक निर्माण के संकट, मीडिया की दयनीय स्थिति, अचानक पैदा होकर गायब हुए उरीगौड़ा-नंजेगौड़ा, व्हाट्सएप विश्वविद्यालय के स्नातकों की ज्ञानमीमांसा, झूठों का महिमामंडन, नकली नेताओं की शरारतें, समाज को पीछे धकेलने वाले अंधविश्वास, राजनेताओं के हास्यास्पद बयान, ट्रोल ग्राहकों की कठिनाइयां आदि कई बातें यहां कटारिया के कटाक्ष का शिकार हुई हैं।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eकन्नड़ में पूर्णचंद्र तेजस्वी, लंकेश आदि ने व्यंग्य का प्रभावी ढंग से उपयोग किया है। चैप्लिन ने इस मामले में अद्भुत उपलब्धि हासिल की थी। उन्होंने हमारी सामान्य धारणाओं में निहित विरोधाभासों को निडरता से उजागर किया था। लंकेश द्वारा प्रयुक्त 'बं' और 'गुं' शब्द एक समय में राज्य की राजनीति को हिला चुके थे। इस परंपरा को अपने ही तरीके से आगे बढ़ाते हुए चंद्रप्रभा कटारिया ने इस पुस्तक में वर्तमान काल में प्रचलित कई शब्दों का प्रयोग किया है। आने वाले दिनों में ये भाषाविदों के लिए भी उपयोगी हो सकते हैं।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eकटारिया के व्यंग्य और विडंबनाएं वास्तविकता के विरोधाभासों को निडरता से उजागर करती हैं। इनके पढ़ने से समाज के कई घटनाक्रमों पर बात करने और चर्चा करने की प्रेरणा मिलती है। यदि लेखक मनुष्य की मूर्खताओं के बारे में नहीं लिखेंगे तो और कौन लिखेगा?\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e-पुरुषोत्तम बिलिमले\u003c\/p\u003e","brand":"BEETLE BOOK SHOP","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48657157194011,"sku":"","price":180.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0686\/2150\/0699\/files\/katari-anchina-nadige-contemporary-parodies-4569748.jpg?v=1767533525","url":"https:\/\/beetlebookshop.com\/hi\/products\/katari-anchina-nadige-contemporary-parodies","provider":"Beetle Book Shop","version":"1.0","type":"link"}