{"product_id":"ilisalagada-shilube","title":"इलिसलागडा शिलुबे","description":"\u003cp\u003eएक बार लंकेश ने कहा था, 'अत्यधिक तर्कसंगतता भी जीवन को नीरस बना देती है।' रघुनाथ की लेखन शैली इस बात की याद दिलाती है। भारत के पत्रकारिता क्षेत्र में, दो महान हस्तियों ने देश के निर्माण में काम किया है। एक गांधी। दूसरा बाबा साहेब अंबेडकर। यहाँ के लेख इस बात की पुष्टि करते हैं कि इन दोनों व्यक्तित्वों के सपनों की छाया रघुनाथ के मन से होकर गुजरी है। पुस्तक 'इळिसलागाद शिलुबे' (न उतारी जा सकने वाली सूली) का शीर्षक ही दुनिया के दुखों को समझने की बात कहता है। इस समय और हर समय इस देश में जाति, धर्म और सांप्रदायिकता बार-बार जहर उगल रही है। इन्हें जड़ से उखाड़ना संभव नहीं है। लेकिन, कम से कम इन्हें नरम करने का प्रयास किया जा सकता है। रघुनाथ लिखकर यही नरम करने का काम कर रहे हैं। कुछ लेखों में उन्होंने कुछ विषयों पर कड़े शब्दों में बात की है, लेकिन उनकी लेखन शैली ऐसी है कि जिनके खिलाफ कहा गया है, वे भी इसे स्वीकार कर लेते हैं। रघुनाथ में यह विशेष गुण है कि वे अक्षरों को वाक्य बनाते समय बहुत सूक्ष्मता से लिखते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि वह वाक्य दूषित न हो।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e-सुब्बू होलेयार\u003c\/p\u003e","brand":"BEETLE BOOK SHOP","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49994410787099,"sku":"","price":225.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0686\/2150\/0699\/files\/ilisalagada-shilube-9379186.jpg?v=1767531366","url":"https:\/\/beetlebookshop.com\/hi\/products\/ilisalagada-shilube","provider":"Beetle Book Shop","version":"1.0","type":"link"}