{"product_id":"hindugalu-mattondu-charitre","title":"हिंदुगालु मट्टोंदु चारित्रे","description":"\u003cp\u003eचंद्रमा में दिखने वाली आकृति को कुछ लोग मनुष्य कहते हैं, जबकि कुछ लोग खरगोश कहते हैं। कुछ अन्य लोग उसे बत्तख और खरगोश मानते हैं। यह इस बात का एक रूपक है कि कैसे हिंदू एक ही चीज़ पर दो तरह के विचार रखते हैं। इस कृति का उद्देश्य इस दोहरी दृष्टि को स्पष्ट करना है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eवेंडी डोनिगर\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e*******\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eजिसे हिंदू धर्म कहा जाता है, वह वास्तव में कोई एक मत नहीं, बल्कि एक जटिल, विशिष्ट संस्कृति है। इसके कोई अकेले वारिस या प्रवक्ता नहीं हैं। ऐसे सागर सदृश प्राचीन जीवन पद्धति को बस इतना ही कहकर समाप्त कर देना मूर्खता होगी। यह हाँ-नहीं है; हाँ-नहीं दोनों हाँ हैं; हाँ-नहीं दोनों नहीं हैं और इनमें से कोई भी नहीं है। इस प्रकार अनेकांत, कोण, समृद्ध तत्वदर्शन, स्मृतियाँ, कथाएँ एक-दूसरे में घुलमिल कर इतिहास बन गई हैं। यह किंवदंती भी है। इतिहास ही केवल निश्चित है, किंवदंती केवल काल्पनिक है, ऐसा भी नहीं कहा जा सकता क्योंकि ये कई आयामों में\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eआपस में गुंथे हुए हैं। इन सबको खुली आँखों और मुक्त मन से देखना साक्षात्कार के समान एक क्रिया है। शायद यह इसके लाक्षणिक अर्थ में विश्वरूप दर्शन है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eडॉ. बंजगेरे जयप्रकाश\u003c\/p\u003e","brand":"BEETLE BOOK SHOP","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":51290353697051,"sku":null,"price":432.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0686\/2150\/0699\/files\/hindugalu-mattondu-charitre-6487745.jpg?v=1767529565","url":"https:\/\/beetlebookshop.com\/hi\/products\/hindugalu-mattondu-charitre","provider":"Beetle Book Shop","version":"1.0","type":"link"}