{"product_id":"hennu-sankara-kaalada-aatmaprajne","title":"हेन्नु : संकरा कालदा आत्मप्रज्ञे","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003eलेखक डॉ. एच.एस. अनुपमा की रचना 'हेन्नु संकर कालदा आत्मकथे' है। महिलाओं के लेखन पर आधारित यह रचना नारीवादी दृष्टिकोण का दर्पण है।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp dir=\"ltr\"\u003e\u003cspan\u003eदम घोंटने वाली पुरुष-प्रधान व्यवस्था में बलात्कार केवल ज़बरदस्ती की यौन क्रिया नहीं है। यह एक व्यक्ति\/महिला के रूप में स्त्री को नष्ट करने; स्त्री को यह कहकर धमकाने कि तुम एक स्त्री हो; और सत्ताधारी वर्ग द्वारा शक्तिहीन वर्ग को नियंत्रित करने का एक राजनीतिक साधन है, इस बात पर यह कृति गहन चर्चा करती है।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp dir=\"ltr\"\u003e\u003cspan\u003eयह कृति उन बिंदुओं पर सूक्ष्मता और विस्तार से प्रकाश डालती है, जिन पर यह तर्क देते हुए चर्चा की जाती है कि समाज ने महिलाओं को हमेशा अधीन स्थिति में रखने के लिए बलात्कार के हथियार का इस्तेमाल किया है। यह इस बात पर भी प्रकाश डालती है कि प्राचीन काल से ही, चाहे युद्ध हो, विद्रोह हो या क्रांति हो - क्रूरता और उन्माद की अंतिम शिकार महिला ही रही है। यह उन आवाज़ों को भी उठाती है जो विरोध करती हैं कि सभ्य समाज ने विभिन्न कारणों से जो सेना\/पुलिस और अन्य रक्षा प्रणालियाँ बनाई हैं, वे महिलाओं के साथ अत्यंत हीन व्यवहार करती हैं। यह कृति इस बात को भी उजागर करती है कि कैसे रक्षक व्यवस्था ही महिला विरोधी व्यवस्था में बदल गई है, जो सभ्य समाज की विडंबना है।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"BEETLE BOOK SHOP","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":51075590684955,"sku":null,"price":162.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0686\/2150\/0699\/files\/hennu-sankara-kaalada-aatmaprajne-1514034.jpg?v=1767528545","url":"https:\/\/beetlebookshop.com\/hi\/products\/hennu-sankara-kaalada-aatmaprajne","provider":"Beetle Book Shop","version":"1.0","type":"link"}