{"product_id":"helavva-chamunda-yaaru-neenu","title":"हेलव्वा चामुंडा... कौन हो तुम?","description":"\u003cp\u003eप्रो. पी.वी. नंजराज अरसु की\u003cbr\u003eहैलव्वा चामुंडा... तुम कौन हो?\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\"हैलव्वा चामुंडा... तुम कौन हो?\" - प्रो. नंजराज अरसु द्वारा लिखी गई इस नई पुस्तक को दिया गया यह अर्थपूर्ण और उचित नाम है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eप्रो. अरसु को मैसूर, महल, राजशाही और चामुंडी पहाड़ियों से संबंधित इतिहास, मिथक, विश्वास और लोककथाएं अच्छी तरह से पता हैं। उन सबके बीच पले-बढ़े अरसु को इन प्रचलित बातों में कितना सच और कितना झूठ है, यह प्रश्न गहराई से परेशान करता है। देवी का अवतरण कब, कहाँ और कैसे हुआ, इस पर अरसु पृथ्वी और आकाश के बीच मिलने वाले सुरागों और संकेतों का सहारा लेते हुए, जड़ से लेकर शाखा तक, उसके मूल को खोदते हैं, छानबीन करते हैं और तलाशते हैं। यह एक व्यापक और बहुमूल्य ग्रंथ है जो कर्नाटक के लोग पूजते हैं, उस श्रीचामुंडेश्वरी देवी की अवधारणा के उद्भव और विकास के आकाश-पाताल को समेटे हुए है, और तटस्थ भूमिका में खड़े होकर सिंहलोकन करता है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eयह एक बहुआयामी और मूल्यवान पुस्तक है। धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और लोकगीत के क्षेत्र के शोधकर्ताओं के लिए यहां उपयोगी जानकारी भरी पड़ी है। भाषा के अध्ययन के लिए भी यहां सामग्री है। यहां केवल पौराणिक कथाएं नहीं, बल्कि इतिहास भी है। लेकिन इतिहास ने साहित्य का कवच पहन रखा है। क्या यह चामुंडी की मूर्ति हो सकती है, क्या देवी की अवधारणा यहां से आई होगी, इस परिकल्पना या धारणा से वे विभिन्न स्रोतों की खोज करते हैं। उनकी प्रत्येक परिकल्पना और अनुसरण किया गया नेति मार्ग जिज्ञासा जगाता है। विविध और हृदयस्पर्शी प्रस्तुति विधि और तकनीक रुचि को बढ़ाती है। वे पाठकों और असहमत लोगों को अगल-बगल बैठाकर बातचीत में संलग्न होते हैं। अपने विचारों को रोज़मर्रा की बोलचाल की भाषा में जीवंतता के साथ साझा करने का उनका तरीका बहुत मजबूत है। उनके द्वारा साक्षात्कार किए गए व्यक्तियों के साथ बातचीत करने, पाठकों की ओर से प्रश्न पूछने का तरीका ऐसा है मानो प्राचीन और आधुनिक हाथ में हाथ डालकर वर्तमान में चल रहे हों, यह मनभावन है। इसमें व्यंग्य है। थोड़ा हास्य, विनोद, सहजता से अंग्रेजी-उर्दू शब्दों का प्रयोग, बिना किसी हिचकिचाहट के बात करना, स्वाभाविक शैली - ये सब पाठकों को गुदगुदाते हैं।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e- नाडोजा प्रो. हम्पना\u003c\/p\u003e","brand":"BEETLE BOOK SHOP","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":50194881380635,"sku":"","price":585.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0686\/2150\/0699\/files\/helavva-chamunda-yaaru-neenu-2301249.jpg?v=1767529145","url":"https:\/\/beetlebookshop.com\/hi\/products\/helavva-chamunda-yaaru-neenu","provider":"Beetle Book Shop","version":"1.0","type":"link"}