{"product_id":"haaruva-hakkige-hasirele-torana","title":"उड़ते पक्षी के लिए हरी पत्तियों का तोरण","description":"\u003cp\u003e* दिवंगते एन. डिसूजा, जिन्हें बाल साहित्य जगत की नब्ज कहा जाता है, उनकी लघु-उपन्यास संग्रह \"हारुवा हक्कीगे हसिरेले तोरना\" बच्चों के मन को चुंबक की तरह आकर्षित करती है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e* एन. डी. के साहित्य में \"ऊरिगोंडू हेसरु\" (एक गाँव का नाम) बहुत दिलचस्प है। उस गाँव का नाम गीजुगा था। एक बार बच्चे आपस में चर्चा करते हैं कि हमारे गाँव का नाम गीजुगा है, लेकिन गाँव में एक भी गीजुगा पक्षी या गीजुगा का घोंसला नहीं है। वे बड़ों से भी कुछ सवाल पूछते हैं। बड़े अपनी गलती महसूस करते हैं और अपना सिर झुकाते हैं। गाँव के पास एक नहर थी। उसका नाम मज्जिगे हला था। गाँव वालों ने उसके किनारे के सभी पेड़ काट दिए थे, तब पक्षी गायब हो गए थे। गीजुगा का घोंसला भी गायब हो गया था।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e* उस गाँव में एक वन अधिकारी आए। बच्चों ने उनसे मिलकर पौधे लाने को कहा और सभी ने मिलकर मज्जिगे हला के किनारे पौधे लगाए। पौधे बड़े पेड़ बन गए। वहाँ गीजुगा पक्षियों ने घोंसला बनाया और गाँव में फिर से रौनक लौट आई। लोगों ने बच्चों के नाम की सराहना की।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e* डिसूजा ने यहाँ मलनाड के पक्षियों और जानवरों के जीवन को चित्रित करने वाली कहानियाँ दी हैं। ये कहानियाँ केवल बच्चों की कहानियाँ नहीं हैं। ये हम सभी के बचपन की कहानियाँ भी हैं। इस कारण से, इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह कृति बड़ों और छोटों दोनों के लिए पढ़ने योग्य है।\u003c\/p\u003e","brand":"BEETLE BOOK SHOP","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":50029334692123,"sku":"","price":120.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0686\/2150\/0699\/files\/haaruva-hakkige-hasirele-torana-6456998.jpg?v=1767529746","url":"https:\/\/beetlebookshop.com\/hi\/products\/haaruva-hakkige-hasirele-torana","provider":"Beetle Book Shop","version":"1.0","type":"link"}