{"product_id":"bharateeya-tatvajnana-vaicharika-mattu-samajika-sangarsha","title":"भारतीय तत्त्वज्ञान - वैचारिक आणि सामाजिक संघर्ष","description":"\u003cdiv class=\"col-lg-12\"\u003e\n\u003cp align=\"left\"\u003eसमाज के भीतर आर्थिक और राजनीतिक संघर्ष एक तरफ़, वैचारिक क्षेत्र के अंदर की लड़ाइयाँ एक तरफ़. इनके बीच के संबंध को स्पष्ट करना आसान नहीं है. क्योंकि, यह संबंध बहुत जटिल होता है, उलझा हुआ होता है. वह सरल नहीं होता. स्पष्ट रूप से दिखाई भी नहीं देता. विभिन्न वर्गों के हितों और दार्शनिक क्षेत्र में उनका प्रतिनिधित्व करने वाले सिद्धांतों को आपस में जोड़ने वाली श्रृंखला में कई सूक्ष्म कड़ियाँ होती हैं. उन्हें अलग-अलग करके देखना होता है... विषय को समझने में आसानी हो, इसलिए इस पुस्तक में ऋग्वेद के प्रारंभिक काल, मुख्य उपनिषदों के काल और गुप्त साम्राज्य के काल के रूप में विभाजित किया गया है. उस-उस काल की सामाजिक व्यवस्था का वर्णन भी आवश्यकतानुसार दिया गया है. इसके साथ ही भौतिकवादी सिद्धांत और हिंदू धर्मशास्त्रीय सिद्धांत इन दोनों की समीक्षा की गई है. ये दोनों अलग-अलग हैं; लेकिन परस्पर संबंधित दार्शनिक विचार धाराएँ हैं, ऐसा प्रतिपादित किया गया है. बहुमुखी प्रतिभा के धनी एस. जी. सरदेसाई (1907-1996) छात्र जीवन में ही कॉलेज पत्रिकाओं के संपादक रहे, 1929-30 में भारत कम्युनिस्ट पार्टी के मराठी अख़बार 'क्रांति' के संपादक रहे. 1931-34 में मुंबई मिल श्रमिक यूनियन के सचिव रहे. 1934 में मिल श्रमिकों की हड़ताल के संबंध में ढाई साल की सख़्त सज़ा हुई. 'वर्ल्ड मार्क्सिस्ट रिव्यू' और पार्टी के मराठी मुखपत्र 'युगांतर' के संपादक भी रहे सरदेसाई ने अंग्रेज़ी और मराठी भाषाओं में कई वैचारिक कृतियाँ लिखी हैं. प्रसिद्ध लेखक, विद्वान गौरीश कायकिणी ने इस कृति का मराठी से कन्नड़ में सफलतापूर्वक अनुवाद किया है.\u003c\/p\u003e\n\u003c\/div\u003e\n\u003c!----\u003e","brand":"BEETLE BOOK SHOP","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49017469206811,"sku":"","price":180.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0686\/2150\/0699\/files\/bharateeya-tatvajnana-vaicharika-mattu-samajika-sangarsha-9826307.jpg?v=1767534666","url":"https:\/\/beetlebookshop.com\/hi\/products\/bharateeya-tatvajnana-vaicharika-mattu-samajika-sangarsha","provider":"Beetle Book Shop","version":"1.0","type":"link"}