{"product_id":"beedi-hennu","title":"बीड़ी हेन्नु","description":"\u003cp\u003eमराठी मूल : बाबुराव बागुल\u003cbr data-mce-fragment=\"1\"\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eकन्नड़ से हिंदी में अनुवाद : दु. सरस्वती\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e \u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cspan style=\"font-size: 1.6em;\"\u003eइतने में भानु घर के सामने वाली गली में आ गई थी। उसके डर को देखकर लोग पीछे हट गए और उसे जाने के लिए रास्ता दे दिया। गाँव के भले लोग यह देखने के लिए सीढ़ियाँ चढ़ने लगे कि अब कौन-सी आफत आने वाली है। उन्होंने देखा कि कमला बेहोश होकर ज़मीन पर गिरी हुई है और देवराम बंदूक में गोली भर रहा है। यमराज की याद दिलाता उसका भयावह चेहरा पूछने वाले प्रश्नों को रोक रहा था। बाहर भानु अपनी जान और इज़्ज़त बचाने के लिए सारी शर्म छोड़कर दौड़ रही थी। पिछले बीस सालों से वह हवेली की सीढ़ियाँ नहीं उतरी थी। दरवाजों में, छत पर, गली में लोग झुंड बनाकर खड़े होकर उसे दौड़ते हुए देख रहे थे। उसके व्यवहार से वे चकित तो थे ही, उसकी सुंदरता देखकर दंग रह गए। भानु की अटूट सुंदरता देखकर, किसी ने क्रोधित वासना को रोकते हुए कहा, \"बढ़िया माल है।\" उनके अंदर का ज़हर अब और ज़्यादा फैलने लगा था। आग लगने की तरह भानु का शरीर तड़प उठा। तुरंत उसने आँचल का सिरा पकड़कर सिर पर खींच लिया, यह देखकर लोग ऐसे हँसे जैसे बारिश हो रही हो।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e('बीदी हेंणु' कहानी से)\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e \u003c\/p\u003e","brand":"BEETLE BOOK SHOP","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":44340651819291,"sku":"","price":200.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0686\/2150\/0699\/products\/beedi-hennu-4947613.png?v=1767537427","url":"https:\/\/beetlebookshop.com\/hi\/products\/beedi-hennu","provider":"Beetle Book Shop","version":"1.0","type":"link"}