{"product_id":"bayasi-bidda-bestu-ta-ra-su-avara-koneya-kadambari","title":"बयासी बिद्दा बेस्टू - ता रा सु अवर कोनेया कड़ंबरी","description":"\u003cp\u003e \u003c\/p\u003e\n\u003cp style=\"text-align: justify;\"\u003eतलुकु रामस्वामी सुब्बाराया (त.रा.सु.) का जन्म 12 जून 1906 को चित्रदुर्ग जिले के चेलिकेरे तालुक के तलुकु नामक गाँव में हुआ था। वह मूलतः आंध्र प्रदेश के थे। उनके पिता रामस्वामी तलुकु गाँव में आकर बाद में चित्रदुर्ग में वकील बन गए। सुब्बाराया जब इंटरमीडिएट में थे, तब वे देश के स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े।\u003c\/p\u003e\n\u003cp style=\"text-align: justify;\"\u003e\u003cstrong\u003eप्रमुख कृतियाँ:\u003c\/strong\u003e कंबनिय कुयिलु, रक्तररात्रि, दुर्गास्तमान, नृपतुंग, सिडिल मोग्गु, शिल्पश्री, कस्तूरी कंकण, तिरुगुबाणा- ये उपन्यास लेखन कौशल का दर्पण हैं। \u003cstrong\u003eफ़िल्में बनीं कहानियाँ:\u003c\/strong\u003e चंदवल्ली तोटा, हम्सगीते (1956 में बसंत बहार नाम से हिंदी फ़िल्म बनी थी।), नागरहावु, बेंकिय बले, गाळी मातु, बिदुगड़ेय बेली, मसाणादा हू। \u003cstrong\u003eसामाजिक उपन्यास:\u003c\/strong\u003e मनगे बंद महालक्ष्मी, बेड़दा मगु, कारकोटक, मार्गदर्शी, पंजराद पक्षी, खोटानोटु सहित कुल 18 उपन्यास, और बेलकु तंद बालक तथा नालकु+नालकु: ये पौराणिक उपन्यास हैं। रूपसी, तोट्टिलु तूगितु, मल्लिगेय नंदनदल्ली, इदे निजवादा संपत्तु- ये कथा संकलन हैं। \u003cstrong\u003eनाटक:\u003c\/strong\u003e ज्वाळा, मृत्यु सिंहासन, अन्नावतार और महाश्वेते।\u003c\/p\u003e\n\u003cp style=\"text-align: justify;\"\u003eदुर्गास्तमान उपन्यास के लिए उन्हें केंद्रीय साहित्य अकादमी पुरस्कार (1985) मिला। उनका निधन 10 अप्रैल 1984 को हुआ।\u003c\/p\u003e","brand":"Ta Ra Su | ತ.ರಾ.ಸು","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49524953841947,"sku":"","price":117.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0686\/2150\/0699\/files\/bayasi-bidda-bestu-ta-ra-su-avara-koneya-kadambari-9066984.jpg?v=1767533108","url":"https:\/\/beetlebookshop.com\/hi\/products\/bayasi-bidda-bestu-ta-ra-su-avara-koneya-kadambari","provider":"Beetle Book Shop","version":"1.0","type":"link"}