{"product_id":"avala-kaalu-soladirali-poems","title":"अवला कालू सोलादिराली (कविताएँ)","description":"\u003cp\u003eजब बहुसंख्यक लोगों की आवाज़ें तेज़ हो रही हैं, जो कह रहे हैं कि 'जो ज़मीन आपने जड़ें जमाई हैं, जिस ज़िंदगी में आप जी रहे हैं, उनमें से कोई भी आपकी नहीं है', तो क्या इस ज़मीन, लोगों और दिमाग के साथ घुलमिल कर अपना अस्तित्व बनाने वाले कवि के पास 'मेरे गांव में इंसानों को पैदा करके भेज दो' कहने के अलावा कोई और रास्ता है?\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eयह समझने के बाद कि 'यहां केवल गरीब माताओं की गोद को खाली करने की कड़ी प्रतिस्पर्धा है', क्या इस कवि के लिए अपनी कविताओं की पंक्तियों में कोमल रेशमी भावनाओं को लाना संभव है, भले ही वह इसके लिए कितनी भी कोशिश करे?\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eऐसे समाज में जहां मानवता की जड़ें हिल रही हैं, दर्द सहने वाले, जलने वाले, अपमान और कठिनाई का सामना करने वाले यहां के संवेदनशील जीव हैं। फातिमा ने इसी संवेदनशीलता से कविताएं गढ़ी हैं। इसीलिए यहां की कोमल रेशमी भावनाएं गहराई तक चुभने लगती हैं। यह चुभन इतनी तीव्र है कि बार-बार इस तरह की चुभन का शिकार होने वाली कवि मानवता की ओस को सभी के मन में फैलाने के लिए अपनी पंक्तियों को ही हथियार बना लेती है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e'चंडी चामुंडी भद्रकाली \/ फातिमा खतीजा आशा \/ बेथलेहम की मैरी \/ यहां तक कि मेरे गांव की अब्बक्का, पड़ोसी चेन्नम्मा \/ दूर की रज़िया, लक्ष्मियां \/ पीठ पीछे \/ ऐसा गहरा अनुभव जैसे वे चुभो रही हों' इन सभी को अपनी पीठ पर लेकर, उनके बल पर अपनी रचनात्मक लड़ाई लड़ रही फातिमा की मांग है, \"उसके पैर कभी न थकें...\"\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eअक्षता हुंचडकट्टे\u003c\/p\u003e","brand":"BEETLE BOOK SHOP","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":47854582268187,"sku":"","price":90.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0686\/2150\/0699\/files\/avala-kaalu-soladirali-poems-5708760.jpg?v=1767534066","url":"https:\/\/beetlebookshop.com\/hi\/products\/avala-kaalu-soladirali-poems","provider":"Beetle Book Shop","version":"1.0","type":"link"}